Thursday, September 8, 2022
Dark Chocolate लगभग सात दोस्त थे हम. लगभग, कयोंकि कभी-कभी आठ-दस भी हो जाते थे. हम सब चौदह-पंद्रह साल के रहे होंगे. मूलतः, सीधे-सादे से थे हम. लेकिन शहर के रहने वाले थे, इसलिए गाँव वालो से थोडा ज्यादा स्मार्ट समझते थे खुद को. शहर भले छोटा था लेकिन हम उसे गाँव से अच्छा समझते थे. वैसे ही, जैसे कुछ जातियां स्वयं को कुछ अन्य जातियों से बेहतर, उच्चत्तर समझती हैं. खैर, हम सात दोस्त शाम को मिलते, बैठते, घंटो गप्पे मरते और अंत में फुटहा-खसिया, पपरा-जिलेबी, सेव-बुनिया आदि खाकर वापस खाने अपने-अपने घर को जाते. चना-मुढ़ी, जिलेबी, सेव-बुनिया आदि इसलिए खाते थे कयोंकि उस समय पिज़्ज़ा, चाऊ-मिन, बर्गर-स्पैगेटी इत्यादि नही मिलते थे. जिने का तरीका पूरा देहाती था, शायद इसलिए ज्यादा साध्य था. राजेश पटना में पढता था और छुट्टियाँ बिताने घर आया था. वो टाइट जीन्स पहना था. उसके टी शर्ट के स्लीवे भी काफी छोटे थे. वैसे हमलोग भी जीन्स पहनते थे लेकिन हमारे जीन्स मसनद तकिया कि तरह गोल गोल झूलते हुए दीखते थे. और टी-शर्ट के बाजू तो कोहनी के निचे तक आते थे. छोटे शहरो के स्टाइल का सेन्स अभी बड़े शहरों की तरह ‘ईटिंग बाई फ़ॉर्मूला’ वाला नही हुआ था. शाम को वो भी हमारे साथ घुमने आया. एक्चुअली वो आया था - घुमने कम, भौकाल बनाने ज्यादा. सभी उसके फिटिंग जीन्स – टी शर्ट देखकर इम्प्रेस्सेड थे. गर्मियों के दिन थे. नदी के किनारे कहीं-कहीं बहुत ऊँचे थे. एक शाम हम सरे दोस्त इकट्ठे उन्ही में से एक टीला जैसी जगह पर हमसब बैठ गये. गप्पें चलने लगी. राजेश पटना के अपने ‘इंग्लिश-मीडियम’ स्कुल की बाते बताने लगा. बातें अक्चुअली काफी इंटरेस्टिंग थी. सब कान में कान लगाकर सुनने लगे. -एनुअल डे में हमलोग डांस करते हैं, मैंने ‘ये काली-काली आँखें’ पर डांस किया था. -अरे एकदम शाहरुख़ खान बन गया तू तो? -अकेले किया था डांस? -अकेले? आर यु क्रेजी? लॉट्स ऑफ़ गर्ल्स!! -गर्ल्स!! -लड़की?? सब हाउ-हाउ चिल्लाने लगे. राजेश एकदम ब्लश करने लगा. तभी किसी ने कहा, -साला बुरबक समझते हो का बे? कोई टीचर किसी लड़का को लड़की को छूने देगा का? और डांस बिना छुए हो सकता है का. इहवां एगो लड़की को एगो लड़का खाली छु भर दिया था सुरसती पूजा के पोरग्राम में, मास्टर लोग धुन के रख दिए थे ससुर को. और तुम बकलोली खाद रहा है. साला हमलोगों को एकदम चोन्हर बुझता है का रे? वह सफाई देता रहा. कोई विश्वास कर ही नही रहा था. इसी चक्कर में हमलोग भूल गये थे कि चने भी थे. अतः खसिया-फुटहा निकल गया, खादोना में था. सब खाने लगे. राजेश फिर स्टाइल मारने लगा. वह सिर्फ देखता रहा. -मुंह काहे ताक रहा है, खाओ कि तुमको नेवता भेजना पड़ेगा का? -कम ऑन, ये क्या बोरिंग चीजे खाते हो तुमलोग? -बोरिंग? चना बोरिंग होता है? बनेगा जादा हीरो? तुम का खाता है, पन्तुआ? -व्हाट्स पंतुआ? -तो तुम पन्तुआ नही जानता है? -नो. आइ डोन्ट नो. -अरे केतना अंग्रेजी झाड़ रहा है भाई? हिंदी-भोजपुरी एकदमे भुलाइये गया का? -फुटहा नही खाता तो क्या खाता है बे? -मी? -येस तुम रे. इस पर राजेश ने पूरा फिल्मी स्टाइल में अपने जीन्स में हाथ डाला. हम सब टुकु-टुकु ताकने लगे. -वाओ उसने जेब से डार्क चोकलेट निकाला. डार्क चोकलेट जानते हैं आपलोग? राजेश फिर से अंग्रेजी झड़ने लगा. -दिस इज डार्क चोकलेट गाईज़. इसमें कोकोया होता है. इससे एंडोर्फिन बढ़ता है. यह टेंशन दूर करता है. इसलिए डार्क चोकलेट खाते हैं हमलोग शहरों में. उस दिन पहली बार मै जाना कि DARK CHOCOLATE इतना इम्पोर्टेन्ट होता है. अभी अभी दूसरी बार जाना कि DARK CHOCOLATE एक्चुअली इतना इम्पोर्टेन्ट होता है. तो आप भी खाइए डार्क चोकलेट. उमेश
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